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Negetive Thought से कैसे बचे (How To Stop Overthinking)

Negetive Thought से कैसे बचे (How To Stop Overthinking)

दोस्तो आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे एक ऐसी बीमारी के बारे में जो अगर किसी को भी हो जाए तो उसको काफी देर तक तो पता ही नहीं चलेगा कि वह उस बीमारी से ग्रसित है। और जब तक उसको पता चलता भी है तो तब तक उसका बहुत ज्यादा वैल्युएबल टाइम वेस्ट हो चुका होता है।


Negetive Thought से कैसे बचे (How To Stop Overthinking)



हम बात कर रहे हैं ओवरथिंकिंग के बारे में। जरूरत से ज्यादा सोचना।

बंदा बैठा हुआ है किताब खोल कर 1 घंटे से पढ़ाई करने के लिए। लेकिन पिछले 1 घंटे से वह पढ़ाई नहीं कर रहा है बल्कि वह कुछ ना कुछ सोचे जा रहा है, सोचे जा रहा है, सोचे जा रहा है, कोई अंत ही नहीं आ रहा है। सोचने का। सोचने से रुक ही नहीं रहा है। ऐसे सोचे जा रहा है जैसे उसने सोच नाम के प्लेनेट के टूर का फुल टिकट ले रखा है। जब भी कोई काम करने जाता है, फिर से उसके दिमाग में वही सोच घुसी रहती है। जब कोई डिसीजन लेना चाहता है तब भी इतनी बार सोचता है कि डिसीजन ही नहीं ले पाता है। 


(पैरालाइसिस बाय एनालिसिस)

सोच सोच के पूरे थॉट प्रोसेस को लकवा हो गया। पास में बैठ कर झूल रहे हैं। ऐसा कर सकता था, उसको ऐसा नहीं करना चाहिए था। मेरे साथ ऐसा हो सकता था, होना चाहिए था। हो सकता था, होना चाहिए था। हो सकता था, क्यों नहीं हुआ, पास्ट नहीं तो फ्यूचर में झूलते रहेगा। क्या होगा, कैसे होगा नहीं कर पाया तो? और तो और अगर कोई घर पर रात को आने में थोड़ा लेट हो गया तो सोच सोच के गला सुखा जा रहा है कि कहीं वह फिल्मों की तरह दिया बुझने वाला सिन तो नहीं होने वाला है। देखो भाई देखो! बनना था आपको वॉरियर्स और बन गया वरीयर। चिता बनना था, चिंता कर करके बर्बाद हो गए। 


आज इसी ज्यादा सोचने वाली बुरी आदत का इलाज करेंगे। श्री भगवत गीता ने अर्जुन बोले, कृष्ण भगवान से कि है कृष्ण इस मन को रोकना असंभव है। क्योंकि यह बहुत चंचल है। कभी यहां तो कभी वहां और जब मेरे जैसा अर्जुन इसको कंट्रोल नहीं कर पा रहा तो एक आम आदमी कैसे इसको कंट्रोल कर पाएगा। श्री कृष्ण बोले कि हां अर्जुन तुम बोल तो सही रहे हो। पर ऐसा नहीं है कि सोच को वश में करने का कोई उपाय नहीं है। अर्जुन ने पूछा, क्या? श्रीकृष्ण बोले अभ्यास (प्रैक्टिस) प्रैक्टिस कर के कोई भी इंसान अपने मन का मालिक बन सकता है। अपने विचारों को जीत सकता है और वह जो सोचना चाहिए, सोच सकता है और जो करना चाहे वह भी कर सकता है। 


अब यह अभ्यास क्या है?

यहां पर क्या प्रैक्टिस करें हम ओवरथिंकिंग से बचने के लिए। अब काम के बात शुरू होती है। ध्यान से पढ़िए इस पोस्ट को लास्ट तक और अगर इसको लास्ट तक पढ़ पाए तो समझ लेना आपको अपने विचारों पर कंट्रोल है। बहुत सारे लोग होंगे जो इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़ भी नहीं पाएंगे क्योंकि उनके विचारों पर कंट्रोल ही नहीं है और मैं ध्यान से समझने के लिए इसलिए बोल रहा हूं आपको क्योंकि ओवरथिंकिंग का जो टॉपिक है ना यह बात है ही ऐसा जिसको बहुत बारीकी से समझना पड़ेगा। देखो होता है क्या जब जब आप ओवरथिंकिंग करते हो तो आप अपने प्रजेंट से निकलकर यानी कि जो काम आप उस टाइम पर कर रहे हो उस से निकल कर या तो आप पास्ट में चले जाते हो या फिर आप फ्यूचर में चले जाते हो। अपने विचारों को वर्तमान में पकड़ कर रखना ही सबसे बड़ा सबूत है कि आपका अपने थॉट्स पर कंट्रोल है और आप उस टाइम अपने काम में पूरा ध्यान लगा पाते हो। जब जब आप पास्ट के बारे में सोचते हो तो आपके मन में सबसे पहले यही आता है कि ऐसा होता तो वैसा होता, वैसा होता तो ऐसा होता।


देखो मेरे भाई पास्ट को आप चेंज नहीं कर सकते, लेकिन उससे आपको जो मैसेज मिला है, उससे आपको जो सीखने को मिला है उस चीज को आप अपने हिसाब से चेंज कर सकते हो। पास्ट केवल और केवल सीखने के लिए ही होता है। पास्ट का पर्पस ही होता है कि बस मेरे से सीखो इस बारे में मत सोचो कि क्या होगा और क्या नहीं होगा। केवल इस बारे में सोचो कि जो भी होगा उससे मुझे क्या मिला। अगर मेरा कुछ नुकसान भी हुआ तो भी मुझे वहां से कुछ ना कुछ जरूर मिलता है और वह कुछ ना कुछ जो होता है वो है सीख। और जैसे ही आप अपने आपको यह रियलाइज करवाएंगे कि पास्ट होता ही सीखने के लिए है। पास्ट ना कभी निकालने के लिए होता है ना दोस देने के लिए होता है। केवल सीखने के लिए होता है। जब जब आपको पास्ट का कोई विचार मन मे आए तो केवल यह सोचो कि जो होना था वह हो गया। अब उस पास्ट से एक मैसेज ले करके मैं अपने आज को कैसे बेहतर बना सकते हो वो सोचिये। आपका जो अल्टीमेट है ना वह होना चाहिए (लिविंग इन द प्रजेंट) वर्तमान में जीना। तो आपने अपने आप को पास्ट से फ्री कर लिया।


और फ्यूचर से अपने आपको ऐसा कहकर फ्री कर लीजिए कि अभी-अभी इस मोमेंट में मै जो काम कर रहा हूं, इस पर ही मेरा फ्यूचर डिपेंड करता है।  फ्यूचर के बारे में सोचने से फ्यूचर नहीं बदलेगा। पास्ट की सीख लेकर वर्तमान को बेहतर बनाने से फ्यूचर बदलेगा। तो आपने अपने आप को पास्ट और फ्यूचर दोनो से अपने आप को फ्री कर लिया। यह बेसिक फंडा हो गया ओवरथिंकिंग का।


अब अगर आपको बार बार कोई थॉट परेशान कर रहा है, टेंशन हो रही है। तो अपने लिए मैनुअली दूसरे दीस्टरेक्सन क्रिएट केजीए। और जब आपने ट्रैक कर लिया कि आप पास्ट और फ्यूचर में झूल रहे हो तो आपके पास ऐसी कोई हॉबी होनी चाहिए जिसमें आप उस वक्त अपना टाइम लगा सको। मान लो वाल्कींग करने चल गए थोड़ी देर बाहर आप जो भी काम कर रहे हो केवल उस काम को इंजॉय करना सीखो बहुत से लोग हैं जो खाना खाते रहेंगे और कुछ सोचते रहेंगे। चाय पीते रहेंगे और कुछ नेगेटिव सोचते रहेंगे। वह भूल ही जाते हैं कि भाई चाय कितनी अच्छी बनी है। खाना कितना अच्छा बना है, मौसम कितना अच्छा है, वह जिंदा है, स्वस्थ है। घर पर सब ठीक हैं उनके। वह लाइफ में अच्छा परफॉर्म कर रहा है। अच्छी मेहनत कर रहा है। एक जो ग्रिटीट्यूड है आपकी जिंदगी में जो आपके पास में है उस वक्त उसको हम भूल जाते हैं। आपके पास ऐसी बहुत सारी चीजें हैं। हम सूरज के ग्रैंडफूल है जिसकी वजह से इस धरती पर जीवन है। हम ऑक्सीजन के ग्रैंडफुल है जिसके वजह से हम सांस ले पाते हैं। इसलिए लंबी सांस लो और बोलो कि जो मुझे चाहिए इस लाइफ में इस वक्त अपने काम पर ध्यान देने के लिए ओवरथिंकिंग से बचने के लिए वह सब है मेरे पास।


ना मेरे पास किसी चीज की कमी है और ना कोई ऐसी चीज जिसकी कमी हो और मैं हासिल ना कर सकूं। ऐसा सोचोगे तो आप अपने हर तरह की चिंता से पास्ट से फ्यूचर से मुक्त कर लेंगे। आपके लाइफ में अभी अगर कोई प्रॉब्लम आ रही है जिसकी वजह से आप सोच सोच कर परेशान हो रहे हो तो आप का टारगेट यह होना चाहिए कि आप उनके सॉल्यूशंस के बारे में सोचो ना कि प्रॉब्लम्स के बारे में। 


अगर मान लो आप की सिस्टर कहीं जॉब करती है और उसके शाम 5:00 बजे छुट्टी हो जाती है और रात के 10:00 बज गए हैं। अभी तक वह घर नहीं आए तो आप क्या बैठकर केवल चिंता करोगे या फिर उनके ऑफिस में कॉल करोगे। कहीं से पता लगाओगे या कहीं से हेल्प लोगे। यानी कि एवरी टाइम एवरी मोमेंट यू हैव टू चॉइसेज आइदर यू थिंक अबाउट प्रॉब्लम और यू थिंक अबाउट इट्स सलूशन हर टाइम हर घड़ी आपके पास दो ऑप्शन होता है। आप या तो प्रॉब्लम के बारे में सोचते रहे या फिर सॉल्यूशंस के बारे में सोचे। आपको अपने लाइफ का चार्ज खुद रहना पड़ेगा। अगर आप उस जगह पर नहीं हो अपने लाइफ में जहां पर आज आपको होना चाहिए तो इसमें आब भी देरी नहीं हुई हैं। आपको उस चीज को तो नहीं लेकिन उससे बेहतर चीज को जरूर अचीव कर सकते हो। और जब आप अपने आप को कन्वेंस कर लेते हो? मोटिवेट कर लेते हो कि यू डिजर्व बेटर आप उससे बेहतर डिजर्व करते हो। तब आप अपने आप में कॉन्फिडेंस और कौसेंट्रेशन डेवलप करते हो। और आप में कोई कमी भी रह जाती है जिसके वजह से आप उसे आज भी भूल नहीं पा रहे हो तो एक चीज याद करो। इस दुनिया में कोई भी बंदा परफेक्ट नहीं है।


एक कहानी है। सच है कि झूठ मुझे नहीं पता। द्रौपदी ने अपने पुराने जीवन में बहुत बड़ी तपस्या की। भगवान प्रसन्न होकर प्रकट हुए और बोले कि क्या चाहिए वरदान तुम्हें बताओ तो द्रोपति ने 5 गुण बताया और कहा कि हे भगवान जिस पुरुष में यह पांचो गुण हो उसी को मेरा पति बनाना। भगवान ने समझाया कि देखो ऐसा इंसान तो हो ही नहीं सकता। इंसान मैंने बनाया मुझे पता है ऐसा इंसान हो ही नहीं सकता। दूसरा वरदान मांग लो। नहीं मुझे तो ऐसा पति ही चाहिए जिसमें मेरे यह पांचो गुण हो। भगवान ने बोला, ऐसा पॉसिबल तो नहीं है लेकिन में कर दूंगा मैं। तथास्तु! हुआ क्या अगले जन्म में द्रोपदी के पांच पति मिल गया तो जब भगवान खुद बोल रहे हैं कि कोई भी परफेक्ट नहीं है। उन्होंने ऐसा इंसान बनाया ही नहीं है जो हर काम में हर फील्ड में हर क्वालिटी में सबसे अच्छा हो। सबसे बेस्ट हो। ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई फिल्मों में ऑस्कर लेने वाला स्विमिंग में भी इंटरनेशनल गोल्ड मेडल ला रहा, मैराथन में भी गोल्ड मेडल ला रहा है। राष्ट्रपति भी बन गया हो, उससे सब इंसान खुश भी है। किसी को उससे शिकायत भी नहीं है। दुनिया का सबसे बड़ा एस्ट्रोनॉट भी वही है। वह बृहस्पति ग्रह पर भी जा सकता है, जिसको दुनिया की सारी किताबें दिमाग से याद है। ऊपर वाले ने ऐसा इंसान बनाया ही नहीं है। कोई ना कोई कमी जरूर होती है।


इसीलिए अगर आप इसलिए ओवरथिंकिंग कर रहे हो कि आप में कोई कमी हो या अगले बंदा में कोई कमी है। उससे आपको फर्क पड़ रहा है तो सोचिए कि इट्स नेचुरल अगर उसमें कोई कमी है तो अच्छाई भी जरूर है। आपने जो फोकस डाल रखा है जो आपकी फोकस पॉइंट है। उसका फोकस नेगेटिव चीजों से है, उसे पॉजिटिव चीजों पर डालो। और जैसा कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कहा था कि अपने विचारों को कंट्रोल करना तो मुश्किल है लेकिन इंपॉसिबल नहीं है। और इसका तरीका यही है कि अभ्यास करते रहिए। किस चीज का अभ्यास पास्ट और फ्यूचर के थॉट्स से आजाद होकर बस अपने काम पर फोकस करने मदद करता है।

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