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Milk Powder Making Business Idea: मिल्क पाउडर बनाने के बिज़नेस कैसे शुरू करें ?

डेयरी वाइटनर या Milk Powder बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें ?

Coconut Milk Powder Making Business : नारियल का दूध पाउडर उत्पादन व्यवसाय शुरू करें

डेयरी वाइटनर या Milk Powder बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें (डेयरी व्हाइटनर बिजनेस कैसे करें, आवश्यकता, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस, लागत, जोखिम, फ़ायदा, मार्केट में मांग, प्रॉफ़िट, इनवेस्टमेंट ) Dairy Whitener, Milk Powder Business (how to start dairy business, milk powder business idea, risk, profit, investment, manufacturing, benefits, marketing demand)


आज के समय में एक बेस्ट क्वालिटी का दूध मिलना बहुत मुश्किल हो गया है इसलिए हमें डेरी वाले दूध या मिल्क पाउडर के ऊपर निर्भर होना पड़ता है और मिल्क पाउडर के जरिए ही दूध की मात्रा को दूध की पूर्ति को पूरा किया जाता है.


Milk Powder Making Business

मिल्क पाउडर या डेरी वाले दूध की डिमांड त्योहारों के मौसम में और भी ज्यादा बढ़ जाती है और त्योहारों के मौसम में घटिया क्वालिटी व मिलावट वाला दूध भी आने लगता है इसलिए अगर आप एक बढ़िया और अच्छी क्वालिटी का मिल्क पाउडर या क्रीम वाला दूध तैयार करते हैं उसको सेल करते हैं तो आप इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं अगर आप एक बढ़िया और अच्छा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं.


आपके लिए मिल्क पाउडर का बिजनेस एक बढ़िया बिजनेस होने वाला है क्योंकि यह एक ऐसा बिजनेस है जो कि दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जाता है तो इस ब्लॉग में हम आपको मिल्क पाउडर बनाने की विधि के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं मिल्क पाउडर कैसे बनाया जाता है, इसको बनाने के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता होती है, इसको कैसे शुरू किया जा सकता है और इसकी सप्लाई कैसे होगी


आज हम इस आर्टिकल के जरिए मिल्क पाउडर को तैयार करने वाले बिज़नेस के बारे में आपको विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं. चलिए जानते हैं कि किस तरह से मिल्क पाउडर बिज़नेस (Milk Powder Making Business) को शुरू किया जाता है.




मिल्क पाउडर क्या है

सबसे पहले आपके लिए जाना बहुत जरूरी है कि आखिरकार मिल्क पाउडर क्या होता है मिल्क पाउडर एक प्रकार का ऐसा डेयरी उत्पाद है जो कि गाय के दूध से बनाया जाता है इस पाउडर का इस्तेमाल उस जगह पर ज्यादा किया जाता है जहां पर दूध की खपत ज्यादा मात्रा में होती है इस प्रकार के पाउडर के जरिए दूध की मात्रा को पूरा किया जाता है.


भारत में आपको अलग-अलग कंपनियों के मिल्क पाउडर देखने को मिलेंगी जिनमें मुख्य रुप से नेस्ले, ब्रिटानिया जैसी कंपनियां मिल्क पाउडर बनाती है मिल्क पाउडर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं. पहला स्किम्ड मिल्क पाउडर और दूसरा फुल क्रीम मिल्क पाउडर शकील पाउडर में 1.5% वसा व घुलनशील विटामिन बहुत ही कम पाए जाते हैं.जबकि फुल क्रीम मिल्क पाउडर में 26% वसा होती है जो लोग ज्यादातर कलौरी का इस्तेमाल करते हैं.


उनको कम वसा वाले स्किम्ड मिल्क पाउडर का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि कई लोग फुल क्रीम मिल्क पाउडर से दही जमा कर इस्तेमाल करते हैं उनके लिए फुल क्रीम मिल्क पाउडर ठीक नहीं होता एक समय ऐसा था जब मिल्क पाउडर का इस्तेमाल सिर्फ नॉर्मल में ही किया जाता था लेकिन दूध की मात्रा घटती जा रही है और दूध की खपत बढ़ती जा रही है. वैसे ही धीरे-धीरे मिल्क पाउडर की मांग भी मार्केट में बढ़ने लगी है.

अब मिल्क पाउडर का इस्तेमाल सिर्फ घरो में ही नहीं बल्कि होटल दाब्बे और रेस्टोरेंट आदि में भी होने लगा है इसीलिए भारत में अलग-अलग कंपनियां मिल्क पाउडर बनाने में लगी है जितनी भी कंपनियां मिल्क पाउडर बनाती है उन सभी कंपनियों के मिल्क पाउडर बनाने का तरीका अलग अलग होता है.


वे सभी कंपनियां अपने अपने मिल्क पाउडर में अलग-अलग मात्रा में घुलनशील विटामिन, वसा और चीनी की मात्रा रखती है.हमारे देश में लगातार दूध की खपत बढ़ती जा रही है और दूध का उत्पादन बहुत कम मात्रा में होता है इसलिए हमारे देश में सबसे ज्यादा मिल्क पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है यदि आप मिल्क पाउडर बनाकर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो आप इस बिजनेस को बहुत ही आसानी से शुरू कर सकते हैं



डेयरी वाइटनर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस क्या है?

इसे मिल्क पाउडर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस भी कहा जाता है। डेयरी व्हाइटनर प्रोडक्ट में प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम और विटामिन की भरपूर मात्रा होती है। जिस प्रकार ताजा दूध लिक्विड फॉर्म में होता है, उस प्रकार यह नहीं होता है। यह पाउडर के तौर पर होता है जिसे तैयार करने के लिए अलग-अलग प्रक्रिया का पालन होता है। संक्षेप में कहा जाए तो ताजे दूध को डिहाइड्रेट करके मिल्क पाउडर यानी कि डेयरी व्हाइटनर बनाया जाता है और जब किसी व्यापारी द्वारा दूध को डिहाइड्रेट करके उसका मिल्क पाउडर बनाया जाता है तो उसे ही डेयरी व्हाइटनर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस कहा जाता है।



डेयरी व्हाइटनर की आवश्यकता क्या है?

दूध जल्दी खराब हो जाता है। यही वजह है कि जब इसका इस्तेमाल करके डेयरी व्हाइटनर अथवा मिल्क पाउडर बनाया जाता है तो इसे इस्तेमाल करने का समय बढ़ जाता है अर्थात मिल्क पाउडर या फिर डेयरी व्हाइटनर को हम लंबे टाइम तक इस्तेमाल में ले सकते हैं। इसके अलावा मिल्क पाउडर की खास बात यह है कि इसे स्टोर करने के लिए किसी स्पेशल टेंपरेचर की जरूरत नहीं होती है। आप इसे नॉरमल टेंपरेचर पर 1 साल तक इस्तेमाल में ले सकते हैं। मिल्क पाउडर का इस्तेमाल अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थों को बनाने में किया जाता है, जिसमें बेकरी और कन्फेक्शनरी के प्रोडक्ट प्रमुख है। हालांकि इस बात में भी कोई दो राय नहीं है कि मिल्क पाउडर ताजे दूध के मुकाबले में पौष्टिक तत्वों में कम होता है परंतु दूसरी तरफ मिल्क पाउडर को लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और ताजा दूध 1 से 3 दिनों में खराब हो जाता है।



डेयरी व्हाइटनर के उपयोग क्या है?

डेयरी व्हाइटनर का उपयोग नीचे दिए गए कामों के लिए किया जाता है।


• चाय और कॉफी बनाने के अलावा मिल्क पाउडर का इस्तेमाल चॉकलेट, केक और दूसरे बेकरी प्रोडक्ट को बनाने में होता है।


• जब मिल्क पाउडर को बेकरी प्रोडक्ट में मिलाते हैं, तो यह हिटिंग और बेकिंग होने की वजह से उस प्रोडक्ट के टेस्ट को बना करके रखता है, साथ ही उसे मलाईदार बनाने में भी सहायक होता है।


• मिल्क पाउडर प्रोडक्ट की सिचुएशन को सुधारने में सहायक होता है साथ ही यह ग्लोब्यूल्स को गांठ में चेंज होने से रोकता है।


• इसका टेस्ट मुंह को अच्छा लगता है साथ ही यह कम फैट वाले प्रोडक्ट में चिकनाई को बना करके रखता है। इसके अलावा प्रोडक्ट को मलाईदार भी बनाता है।


• कुछ मिल्क पाउडर सरलता से खाद्य प्रोडक्ट में मिक्स हो जाते हैं। इसलिए उन मिल्क पाउडर का इस्तेमाल सूप और सॉस बनाने में होता है।



डेयरी व्हाइटनर बिजनेस कैसे करें?

इसमें कच्चे माल के तौर पर दूध का इस्तेमाल होता है और जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि दूध में फैट जितना अच्छा होगा उतना ही बढ़िया मिल्क पाउडर तैयार होगा। इसलिए जब कोई व्यवसाई इस बिजनेस को स्टार्ट करें तो उसे चाहिए कि वह किसी ऐसी लोकेशन का सिलेक्शन करें, जहां पर उसे ताजा और शुद्ध दूध आसानी से प्राप्त हो सके।


1: जमीन की व्यवस्था करें

इस बिजनेस को स्टार्ट करने के लिए आपको सबसे पहले जमीन की व्यवस्था करनी है और जमीन की व्यवस्था आपको इसी प्रकार से करनी है ताकि आसानी से इसमें सभी प्रकार की मशीनरी का सेटअप हो जाए, साथ ही आपको जमीन की व्यवस्था ऐसे लोकेशन पर करनी है, जहां पर आपको आसानी से ताजा दूध प्राप्त हो सके, साथ ही जहां पर पक्के रोड भी हो। ताकि आसानी से दूध की गाड़ियां आ जा सके। अगर बिजनेसमैन के पास अपनी खुद की जमीन नहीं है तो वह स्टार्टिंग में चाहे तो किराए पर भी जमीन को ले सकता है परंतु वह इस बात को ध्यान रखें कि जहां कहीं भी वह जमीन ले, वहां पर पानी, बिजली और सड़क की अच्छी व्यवस्था हो।


2: पैसे की व्यवस्था करें

इस बिजनेस में कितने पैसे लगेंगे, यह डिपेंड करता है कि बिजनेसमैन कितने बड़े या फिर छोटे लेवल पर अपना प्लांट स्थापित करना चाहता है, क्योंकि अधिक कैपेसिटी वाले प्लांट को स्थापित करने पर अधिक फंड और कम कैपेसिटी वाले प्लांट को स्थापित करने पर कम फंड लगेगा। इसलिए बिजनेसमैन को चाहिए कि वह अपना बिजनेस प्लान या फिर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर ले। अपने बिजनेस प्लान में वह बिजनेस की जगह, बिजनेस की लोकेशन, बिजनेस में लगने वाला फंड इत्यादि चीजों को ध्यान में रखें, साथ ही बिजनेस को किस प्रकार से सफल बनाया जाएगा, इसका भी ध्यान रखें।


3: लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन प्राप्त करें

डेरी व्हाइटनिंग बिजनेस को स्टार्ट करने के लिए बिजनेसमैन को नीचे दिए गए लाइसेंस प्राप्त करने हैं, साथ ही रजिस्ट्रेशन करवाने हैं।

• प्रोपराइटरशिप के तहत बिजनेस का रजिस्ट्रेशन करवाएं।

• जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाएं।

• बिजनेस के नाम से बैंक में करंट अकाउंट खुलवाएं।

• खुद का बिजनेस है तो एफएसएसएआई लाइसेंस प्राप्त करें।

• नगर निगम से एनओसी ले।

• स्किम का बेनिफिट लेने के लिए एमएसएमई डाटा बैंक में रजिस्ट्रेशन करें।

• ट्रेडमार्क रजिस्ट्रेशन प्राप्त करें।


4:मशीनरी और कच्चे माल की व्यवस्था करें

इस बिजनेस में जो भी मशीन इस्तेमाल की जाती है, वह प्रोडक्शन कैपेसिटी पर ही आधारित होती है और इस बिजनेस को स्टार्ट करने में मशीनरी के ऊपर काफी खर्च करना पड़ता है। इसीलिए बिजनेसमैन को अलग-अलग सप्लायर से संपर्क करना चाहिए और जो सप्लायर अच्छी क्वालिटी की मशीन कम दाम में दे, उसके द्वारा ही मशीनों की खरीददारी करनी चाहिए। मिल्क पाउडर मेकिंग बिजनेस में आपको नीचे दी गई मशीनरी और सामानों की आवश्यकता पड़ेगी।


• स्टोरेज टैंक

• फीड पंप

• प्री- कंडेंसर

• एटमोजर के साथ स्प्रे ड्रायर

• कंडेंसर

• बेबी बायलर

• चिल्लिंग प्लांट

• पैकिंग यूनिट

• लेबोरेटरी टेस्टिंग उपकरण

• अन्य उपकरण 

इसमें आपको नीचे दिए गए रो मटेरियल/ कच्चे माल की भी आवश्यकता पड़ेगी।

• मिल्क

• सिट्रिक एसिड

• मैग्नीशियम ऑक्साइड

• अन्य केमिकल NACL, CACO3

• टिन कंटेनर


इस बिजनेस में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और रो मटेरियल को आप लोकल लोकल स्टोर से खरीद सकते हैं और अगर आपको यह लोकल स्टोर में नहीं मिलती है तो आप ऑनलाइन इंडियामार्ट जैसी वेबसाइट का सहारा लेकर के इस बिजनेस में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के सप्लायर से संपर्क कर सकते हैं और मशीन खरीद सकते हैं। हर मशीन के दाम अलग-अलग होते हैं।


5: डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस में कच्चा माल

मिल्क पाउडर तो बनाने के लिए आपको इतने ज्यादा अलग-अलग प्रकार के कच्चे माल की जरूरत नहीं होती मिल्क पाउडर बनाने के लिए आपको बेस्ट क्वालिटी का दूध स्ट्रिक्ट एसिड मैग्नीशियम ऑक्साइड व  दूसरे केमिकल और कंटेनर की आवश्यकता होगी उसके बाद में मिल्क तैयार करने के बाद चीनी की आवश्यकता होती है. आपको इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी हुआ कि जिस जगह से आप दूध खरीद रहे हैं वह अच्छी क्वालिटी का है और ताजा दूध है इसके लिए आपको कुछ ऐसी जगहों पर संपर्क करना होगा जहां पर बहुत ज्यादा मात्रा में गाय के दूध का उत्पादन किया जाता है.




मिल्क पाउडर कैसे बनाया जाता है

जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया मिल्क पाउडर दो प्रकार का होता है और इन दोनों प्रकार के मिल्क पाउडर को बनाने के लिए अलग-अलग विधि का इस्तेमाल किया जाता है फुल क्रीम मिल्क पाउडर बनाने के लिए दूध को उबालकर उसमें से पानी की मात्रा को अलग कर दिया जाता है और बचे हुए फुल क्रीम मिल्क पाउडर के रूप में तैयार कर दिया जाता है.


जबकि स्किम्ड पाउडर को दूध से पानी और वसा की मात्रा को अलग करके बनाया जाता है और इन दोनों को तैयार करके चीनी बाद डाली जाती है पूरी तरह से मिल्क पाउडर को बनाने के लिए अच्छे इंजीनियर मैं कर्मचारियों की जरूरत होती है वे सभी अलग-अलग मात्रा के दूध को अलग-अलग तरीके से मिल्क पाउडर में बदलने के योग्य होते हैं.


इसीलिए आपको अपनी फैक्ट्री में अच्छे मिल्क पाउडर मेकर की जरूरत होगी.जब आपका मिल्क पाउडर पूरी तरह से तैयार हो जाता है तब उसके बाद में आपको अपनी कंपनी के नाम के साथ बनाई गई पैकिंग में लेबर के द्वारा मिल्क पाउडर को पैक करवाना होता है मिल्क पाउडर को पैक करवाने के लिए आपको अलग-अलग वेट के पैकेट तैयार करने होते हैं.



डेयरी फार्मिंग प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस 

ताजे दूध से मिल्क पाउडर बनाने की लम्बी प्रक्रिया होती है जिसके बारे में नीचे आपको इंफॉर्मेशन दी जा रही है।


1: रो मटेरियल को अलग करना

बता दे कि सबसे पहले जो भी कच्चा माल होता है उसे फैक्ट्री तक पहुंचाया जाता है और फिर उसके बाद सेंट्रीफ्यूगल क्रीम सेपरेटर दूध से क्रीम और स्कीम दूध को अलग करते हैं। अब स्किम दूध में थोड़ा सा क्रीम मिक्स किया जाता है। ऐसा करने पर उसमें फैट की क्वांटिटी बनी रहती है।


2: प्रीहीटिंग प्रोसेस

कच्चे माल को अलग करने की प्रोसेस कंप्लीट हो जाने के पश्चात प्रीहीटिंग प्रोसेस चालू होती है, जिसमें दूध को तकरीबन 75 डिग्री सेल्सियस से लेकर के 120 डिग्री सेल्सियस के टेंपरेचर पर उबाला जाता है। यानी कि गर्म किया जाता है और बता दें कि यह प्रोसेस या तो भाप इंजेक्शन के जरिए संपन्न होती है या फिर हीट एक्सचेंजर के जरिए संपन्न होती है या फिर इन दोनों ही पद्धति के जरिए कंप्लीट होती है।


3: वाष्पीकरण की प्रोसेस

इस प्रोसेस में दूध को अलग-अलग लेवल पर सेंटर किया जाता है। इस प्रक्रिया में दूध को एक ट्यूब के अंदर डाल दिया जाता है और उस ट्यूब के अंदर का टेंपरेचर 72 डिग्री सेल्सियस से थोड़ा सा कम किया जाता है और उस ट्यूब में दूध को उबाला जाता है और फिर दूध में जो पानी होता है, उसे वाष्पीकरण की प्रोसेस के द्वारा हटा लिया जाता है।


4: स्प्रे ड्राइंग

इस प्रोसेस में दूध को एटमाइज्ड करके वाष्पीकरण के जरिए बारीक बूंद में कन्वर्ट कर देते हैं और फिर उसे हॉट चैम्बर में डालने के पश्चात सुखाने की प्रक्रिया चालू होती है और फिर दूध की बूंदों को वाष्पीकरण के माध्यम से ठंडा कर लेते हैं।


5: पैकेजिंग और स्टोरेज 

डेयरी व्हाइटनिंग मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस की आखरी प्रक्रिया में पैकिंग और स्टोरेज शामिल है, जिसमें तैयार मिल्क पाउडर को पैक कर दिया जाता है और फिर उसे रिटेल स्टोर में या फिर दुकानों में भेज दिया जाता है। इनकी पैकिंग प्लास्टिक के बैग में या फिर टीन के डब्बे में ही की जाती है ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहें।




डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस में इन्वेस्टमेंट

इस बिजनेस में कितना इन्वेस्टमेंट करना पड़ सकता है, यह तय नहीं होता है क्योंकि हर बिजनेसमैन इस बिजनेस को छोटे या फिर बड़े लेवल पर स्टार्ट करता है। अगर अंदाज के हिसाब से देखा जाए तो कोई बिजनेसमैन अगर बड़े लेवल पर इस बिजनेस को चालू करता है तो उसे तकरीबन 15,00000 से लेकर के 25,00000 रुपए तक का इन्वेस्टमेंट करना पड़ सकता है। वहीं छोटे लेवल पर बिजनेस को स्टार्ट करने के लिए 7,00000 से लेकर के 10,00000 रुपए तक का इन्वेस्टमेंट करना पड़ सकता है। इन्वेस्टमेंट कभी कबार जमीन, लोकेशन और ट्रांसपोर्ट खर्चे के हिसाब से कम या फिर अधिक भी हो सकती है।



डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस की मार्केटिंग

अपने बिजनेस की मार्केटिंग करने के लिए आप विभिन्न तरीके अपना सकते हैं। आप अखबारों में अपने बिजनेस का विज्ञापन दे सकते हैं। इसके अलावा आप चाहे तो टीवी में भी अपने बिजनेस की एडवर्टाइजमेंट दे सकते हैं साथ ही आप रिक्शा के पीछे भी अपने बिजनेस का बैनर प्रिंट करवा सकते हैं।

इसके अलावा आप छोटे-छोटे परचे में बिजनेस की डिटेल्स को प्रिंट करवा करके उसे लोगों के घरों में बटवा सकते हैं, साथ ही सोशल मीडिया पर आप अपने बिजनेस का पेज बना सकते हैं और उसमें अपने बिजनेस से संबंधित डिटेल्स को दैनिक तौर पर अपडेट कर सकते हैं। इसके अलावा आप चौराहे पर अपने बिजनेस का बोर्ड भी लगवा सकते हैं। इस प्रकार इन सब प्रक्रिया को करने से काफी कम समय में आपके बिजनेस की मार्केटिंग अच्छे तरीके से हो जाएगी।



डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस में फायदा

इस व्यवसाय द्वारा आप को कितना फायदा हो सकता है, इसके बारे में सटीक तौर पर नहीं कहा जा सकता जिसके पीछे वजह यह है कि बेनिफिट प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट के हिसाब से ही काउंट होता है। इसीलिए वास्तविक तौर पर जब आप बिजनेस को स्टार्ट कर देंगे तभी आपको यह पता चलेगा कि इस बिजनेस में कितना फायदा है। हालांकि एक बात है कि जिस प्रकार लोग पशु पालन करना कम कर रहे हैं उस प्रकार से वर्तमान के समय में भी और आने वाले समय में भी इस बिजनेस में काफी अच्छा प्रॉफिट है।



डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस में जोखिम

कोई भी बिजनेस तभी घाटे में जाता है जब पूरी प्लानिंग करके उस बिजनेस को स्टार्ट नहीं किया जाता है। इसलिए हमारी सलाह के अनुसार जो भी व्यक्ति इस बिजनेस को स्टार्ट करें, उसे प्रॉपर मार्केट रिसर्च कर लेनी चाहिए, साथ ही अपने  COMPTITOR के भी प्रोडक्ट का पूरा एनालिसिस करना चाहिए। हो सके तो उसे फील्ड में उतर कर के लोगों की राय भी लेनी चाहिए और उसके बाद ही उसे अपने कदम आगे बढ़ाने चाहिए।



डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस में कर्मचारी

आप इस बिजनेस में कितने कर्मचारियों को काम पर रखना चाहते हैं, यह तो बिजनेस के लेवल पर ही डिपेंड करता है। अगर आपके प्लांट में मशीनें ज्यादा है तो आपको अधिक कर्मचारियों को रखने की आवश्यकता पड़ेगी और आपके प्लांट में मशीनें कम है तो आप को कम कर्मचारियों को रखने की आवश्यकता पड़ेगी।

 फिर भी एक अंदाज के अनुसार छोटे प्लांट में भी आपको काम करवाने के लिए तकरीबन 30 लोगों की आवश्यकता पड़ेगी। वही बड़े प्लांट में काम करवाने के लिए आपको 150 से भी अधिक वर्कर की आवश्यकता पड़ेगी।




Conclusion

हम उम्मीद करते हैं कि हमारे द्वारा बताई गई मिल्क पाउडर बनाने व मिल्क पाउडर बिजनेस को शुरू करने के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी यदि आपको यह जानकारी पसंद आई है और आप ऐसी ही और जानकारियां पाना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट को जरूर विजिट करें.




FAQ

Q: डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस को अन्य किस नाम से जानते हैं?

ANS: मिल्क पाउडर मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस


Q: डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस में कितना इन्वेस्टमेंट करना पड़ेगा?

ANS: यह बिजनेस के लेवल पर डिपेंड करता है।


Q: डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस कहां पर करें?

ANS: जहां पर इलेक्ट्रिसिटी, ट्रांसपोर्टेशन की अच्छी व्यवस्था हो, साथ ही अच्छी लोकेशन हो।


Q: डेयरी व्हाइटनिंग बिजनेस स्टार्ट करने से पहले क्या करें?

ANS: प्रॉपर मार्केट रिसर्च करें।




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