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Oil Mill Business ideas : तेल की मिल का व्यापार कैसे शुरू करें

तेल की मिल का व्यापार कैसे शुरू करें

How To Start Oil Mill Business In Hindi

सरसों के तेल की मिल लगाकर कमाएं मुनाफ़ा, कम निवेश में ऐसे शुरू करें बिजनेस

Oil Mill Business Ideas in Hindi: आज के इस आर्टिकल में हम बात करने वाले हैं तेल की मिल का व्यापार कैसे शुरू करें। इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि इस व्यापार को शुरू करते समय हमें किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इस व्यापार की लागत कितनी हो सकती है, किन जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है और इस व्यापार में जोखिम का स्तर क्या होता है।


Oil Mill Business In Hindi

तेल मिल उद्योग एक ऐसा व्यापार है, जो लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ होता है। व्यक्ति एक दिन में कई प्रकार के तेलों का इस्तेमाल करता है। खाना खाने में, बालों में लगाने में, पूजा पाठ में और भी कई कार्यों में जिस वजह से इस व्यापार की मांग बहुत अधिक होती है।


यह व्यापार काफी कामयाब भी है तो ऐसे व्यक्ति जो वर्तमान समय में किसी व्यापार में निवेश करने का विचार कर रहे हैं या तेल के व्यवसाय में हाथ आजमाना चाहते हैं तो आज का आर्टिकल उन सभी व्यक्तियों के लिए बहुत अधिक आवश्यक और महत्वपूर्ण होने वाला है।


आप इस व्यवसाय से जुड़कर तेल व्यापारी भी बन सकते हैं लेकिन इस व्यवसाय में निवेश करने से पहले आपको बहुत अच्छी तरह इस व्यापार को समझ लेना चाहिए कि किस तरह से इस मिल को खोला जाता है और कौन सा तेल किस प्रकार के बीजों से निकाला जाता है।


देश के सभी घरों में सरसों के तेल का इस्तेमाल ज़रूर किया जाता है. इस तेल का उपयोग मुख्य रूप से खाना बनाने में होता है, जिसको सरसों के बीजों से निकाला जाता है. देश के अधिकतर किसान अपने खेतों में सरसों की फसल लगाते हैं, इसलिए भारत को ऑयल सीड उत्पाद करने वाला सबसे बड़ा देश कहा जाता है. इसकी खेती से किसानों को जितना अच्छा मुनाफ़ा देती है, उससे कई गुना ज्यादा मुनाफ़ा इसका बिजनेस देता है.


आपको बता दें कि सरसों के छोट-छोटे काले और पीले दानों से जो तेल निकाला जाता है, वह बहुत उपयोगी होता है. अगर आप सरसों से तेल निकालने का बिजनेस (Mustard Oil Business) शुरू कर दिया जाए, तो यह आपको सालभर में लखपति बना देगा. यह बिजनेस का एक बेहतरीन विकल्प है. आइए आज आपको सरसों के दानों से तेल निकालने के बिजनेस की पूरी जानकारी देते हैं.


तेल का इस्तेमाल लोगों द्वारा खूब किया जाता है, जिसके कारण विभिन्न प्रकार के तेलों की मांग काफी अधिक रहती है. हमारे देश में ये व्यापार काफी कामयाब है, इसलिए आप चाहें तो तेल बेचने का व्यापार शुरू कर सकते हैं और एक व्यापारी बन सकते हैं. हालांकि तेल की मिल खोलने से पहले आपको ये अच्छे से पता होना चाहिए, कि किस तरह से मिल को खोला जाता है और किस प्रकार के बीजों से तेल निकाला जाता है.



क्या है सरसों तेल का बिजनेस (What is mustard oil business)

अगर आप इस बिजनेस की शुरुआत करते हैं, तो आपको सरसों के दानों से तेल निकालकर बाजार में बेचना होगा. किसानों से आप सरसों के बीज थोक में भी खरीद सकते हैं. इस बिजनेस की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले एक मिल खोलनी होगी, जिसमें करीब 1 से 2 लाख रुपए का निवेश करना होगा. इसके साथ ही आपको बिजनेस से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी जानकारी हासिल करनी होगी. अगर आप मिल, मशीन औऱ सरसों के बीज की अच्छी जानकारी रखते हैं, तो सरसों से तेल निकालने का बिजनेस सफल साबित होगा.



तेलों के प्रकार

भारत के हर एक घर में खाना बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के तेलों का इस्तेमाल किया जाता है। जैतून का तेल, सरसों का तेल, सोयाबीन का तेल, मूंगफली का तेल और बालों में लगाने के लिए भी विभिन्न प्रकार के तेल बाजार में उपलब्ध है। अतः कोई व्यापारी जो इस व्यवसाय में आना चाहता है, उसे इन सभी में से किसी एक तेल का चयन करना होगा, जिसका वह उत्पादन करना चाह रहा है।


आपको उस तेल से संबंधित कच्चे माल और मशीनों को खरीदना होगा। जिस भी तेल को आप बेचना चाह रहे हैं जैसे सोयाबीन का तेल, मूंगफली का तेल और जैतून का तेल क्योंकि सभी तेलों के कच्चे माल या सामग्री अलग-अलग होती है और उन्हें बनाने का तरीका या विधि भी अलग होती है।



क्या होती है तेल की मिल (What is Oil Mill)

तेल की मिल के जरिए बीजों को पीसकर उनका तेल निकाला जाता है और फिर उस तेल को बोतलों में पैक करके बेचा जाता है. हालांकि मिल शुरू करने से पहले आपको कई तरह की मशीनों को खरीदना होगा और ये तय करना होगा कि आप कौन सा तेल बाजार में बेचना चाहते हैं और किस तेल की मिल को शुरू करना चाहते हैं, जैसे कि सरसों का तेल, जैतून का तेल, तिल का तेल इत्यादि.



तेल की मिल का व्यापार का स्तर क्या होना चाहिए?

व्यापारी को व्यवसाय शुरू करने से पहले कई प्रश्नों का उत्तर स्वयं से ढूंढना होता है कि वह किस प्रकार का व्यापार शुरू करना चाहता है, व्यापार का स्तर क्या होना चाहिए, क्या व्यापार को निम्न स्तर से शुरू करना है, मध्यम स्तर से या उच्च स्तर से उस व्यवसाय हेतु उसकी लागत क्या होनी चाहिए आदि।


तेल के व्यापार में प्रतिदिन मीट्रिक टन के हिसाब से तेल का उत्पादन किया जाता है और यह उस व्यापार के स्तर पर निर्भर करता है कि व्यापार किस स्तर का है लघु स्तर, मध्यमिक पर या उच्च स्तर पर।


यदि व्यापार में प्रतिदिन 5 से 10 मीटर टन तेल का उत्पादन हो रहा है तो वह निम्न स्तर का व्यापार है अर्थात लघु स्तर का व्यापार है। यदि मिल में 10 से 50 टन के बीच तेल का उत्पादन हो रहा है तो वह व्यापार मध्यम स्तर की श्रेणी में आता है। लेकिन यदि मिल 50 मीट्रिक टन से अधिक का तेल निकालती है तो वह मिल उच्च स्तर के अंतर्गत आएगी। आप मिनी तेल मिल से भी इस व्यापार को शुरू कर सकते है।



तेल की मिल के लिए कच्चा माल (Raw Material for oil Mill) –

तेल का व्यापार एक ऐसा व्यापार है, जो कि उसके कच्चे माल पर निर्भर करता है और हर तेल का अपना एक कच्चा माल होता है। जैसे कि आप मूंगफली का तेल बनाना चाहते हैं तो उसके लिए आपका कच्चा माल मूंगफली होगी।


आप यदि सोयाबीन के तेल का उत्पादन करना चाह रहे हैं तो उसके लिए आपको सोयाबीन के बीज की आवश्यकता होगी। इसके अलावा बहुत सारी ट्रेनों में उनके कच्चे माल सरसों, सूरजमुखी, कपास आदि होते हैं और यह तेल इन सभी के बीजों से निकाला जाता है।


अतः आप जिस किसी भी तेल का उत्पादन करना चाह रहे हैं, आपको उसके कच्चे माल की व्यवस्था करनी होगी एवं बीज को बेचने वाले दुकानदारों से संपर्क बनाना होगा या फिर आप किसी किसान से भी इसको प्राप्त कर सकते हैं या फिर आप  बाजार से उत्पादित इन बीजों के द्वारा भी आप तेल का उत्पादन कर सकते हैं, जो कि काफी सस्ता होगा।


लेकिन इसके लिए आपको बहुत अधिक बीजों की आवश्यकता होगी, जो कि आप के खेतों से संभव नहीं है। आप किसी दूसरे किसान और दुकानदार से भी इनको खरीदकर तेल का उत्पादन कर सकते है।



व्यापार के लिए मशीनें (Equipment for oil business)

मशीनों की आवश्यकता

वर्तमान समय में किसी भी उत्पादन कार्य में महत्वपूर्ण कार्य वहां संलग्न मशीनें ही करती हैं। मतलब बिना मशीनों के कोई भी कार्य संभव नहीं है। शायद इसीलिए वर्तमान समय को मशीनी युग कहा जाता है। तेल के व्यापार में यदि बात की जाए तो यह व्यापार कई प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है, जिनमें विभिन्न प्रकार की मशीनें लगी हुई होती हैं। हर एक क्रिया के लिए एक मशीन लगाई जाती है जैसे स्क्रू एक्सपेलर, फिल्टर प्रेस मशीन आदि का प्रयोग विभिन्न चरणों में किया जाता है।


आप इनके लिए स्वचालित मशीन या फिर अर्ध स्वचालित मशीन का प्रयोग भी कर सकते हैं। तेल निकालने की छोटी मशीन की कीमत लगभग 4 लाख से शुरू होकर 10 लाख तक की होती है। इन मशीनों को आप ऑनलाइन माध्यम से या फिर दुकानों से जाकर भी खरीद सकते हैं। क्योंकि वर्तमान समय में आप कोई भी कार्य घर बैठे अपने मोबाइल के इस्तेमाल से कर सकते हैं।


वहीं आप अपने तेल निकालने के व्यापार को करने के लिए पूरी तरह से स्वचालित मशीन का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर अर्द्ध स्वचालित मशीन के जरिए भी तेल निकाल सकते हैं.  इन मशीनों को आप https://dir.indiamart.com/impcat/oil-extraction-machine.html, https://www.alibaba.com/showroom/oil-extraction-machine.html और https://www.tradeindia.com/Seller/Machinery/Oil-Extraction-Machine/ लिंक पर जाकर खरीद सकते हो. वहीं इन मशीनों के दाम इनकी गुणवत्ता के हिसाब से निर्धारित किए जाते हैं.



बिजनेस के लिए ज़रूरी उपकरण (Business Tools)

  • ऑयल एक्सपेलर मशीन

  • मोटर 20 एचपी

  • फ़िल्टर प्रेस मशीन

  • गैलन

  • बॉक्स स्टंपिंग मशीन

  • वज़न मशीन

  • सील मशीन


उपयुक्त उपकरणों को चलाने के लिए मोटर का उपयोग करना पड़ता है. यह मोटर बिजली द्वारा चलाई जाती है. इसके अलावा मोटर को डीज़ल इंजन से भी चला सकते हैं.



तेल निष्कर्षण की प्रक्रिया (Oil extraction process)

यह एक ऐसा व्यापार है, जिसकी मांग निरंतर बाजार में रहती है। क्योंकि यह हमारे दैनिक जीवन से जुड़ा हुआ व्यवसाय है। इसलिए यह बहुत ही लाभदायक व्यापार माना जाता है। तेल निकालने की प्रक्रिया या पद्धति की बात की जाए तो यह विभिन्न चरणों में संपन्न होती है, जिनमें मशीनों के अलावा मजदूर भी इस कार्य को करते हैं। अब हम बात करते हैं उन विभिन्न चरणों के बारे में जिनसे तेल का निष्कर्षण किया जाता है।


बीजों का चयन मिल व्यवसाय के अंदर सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण कार्य होता है। सही बीजों का चयन करना जिनसे आप तेल निकालना चाहते हैं। बीजों का चयन करते समय यह बात आवश्यक है कि बीज एकदम सही एवं अच्छी क्वालिटी के होना चाहिए। जब भी आप इन्हें खरीदने जाएं तो जरूर देखें कि वह कहीं से टूटे-फूटे ना हो, सूखे हुए या फिर खराब बीज ना हो। यदि बीजों की गुणवत्ता खराब होगी तो उन से बनने वाला तेल भी खराब ही होगा।


बीजों की सफाई बीजों का चयन करने के बाद दूसरी प्रक्रिया आती है फ्री क्लीनिंग जिसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि जब भी आप बीजों को लेकर आए तो उनकी सफाई करना एक महत्वपूर्ण कार्य है। क्योंकि बीजों में कई तरह की गंदगी मिट्टी रेत पत्थर आदि लगे होते हैं, इन्हें आपको तेल निकालने से पहले साफ करना होता है। क्योंकि यदि बीजों के साथ यह सभी गंदगी पिस जाएगी तो उससे तेल की गुणवत्ता भी खराब हो जाएगी।


इसके साथ ही यह सभी कंकड़ पत्थर आपकी मशीन में फस कर उसे भी डैमेज कर सकते हैं। इसलिए बीजों को चुनने के बाद उन्हें सही तरीके से हाथ से साफ करवा सकते हैं या फिर उन्हें मशीनी सहायता से भी साफ कर सकते हैं।


ऊपर बताई गई सभी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आपका तेल बाजार में बेचने के लिए तैयार हो जाता है और आप इन्हें बोतलों में भरकर बेच सकते हैं. वहीं आपको किसी व्यापारी से इन बोतलों को बनवाना होगा और साथ में ही आपको इन बोतलों पर लेबलिंग भी करवानी होगी.


तेल निष्कर्षण की पूरी प्रक्रिया कई चरण में की जाती है और मशीन की मदद से किसी भी प्रकार के बीजों से तेल निकाला जाता है.


सही बीज का चुनाव करना (seed Selection)– जिस भी बीज का तेल आप निकालना चाहते हैं वो बीज एकदम सही होना चाहिए. इसलिए इन्हें खरीदते समय ये जरूर देख लें कि वो टूटा ना हो, ना ही सूखा हुआ हो और केवल उन्हीं बीजों को चुने जिनकी गुणवत्ता अच्छी हो.


गंदगी को साफ करना (Pre–cleaning) – किसी भी चीज से उसका बीज निकालते समय बीज में कई तरह के पत्थर, मिट्टी और इत्यादि चीजे भी मिल जाती हैं. इसलिए इनसे तेल निकालने से पहले आपको इनमें से इस प्रकार की चीजों को निकालना होगा. क्योंकि अगर बीजों के साथ पत्थर और मिट्टी जैसी चीजे पिस जाएगी, तो उससे तेल की गुणवत्ता खराब होगी, साथ में ही आपकी मशीन में भी ये पत्थर फंस सकते हैं, जिसके चलते मशीन भी खराब हो सकती है. इसलिए एक बार अच्छे बीज का चयन करने के बाद उन्होंने जरूर साफ कर लें. वहीं आप इन बीजों को हाथ से साफ करवा सकते हैं या फिर  मशीन की मदद से भी इन्हें साफ कर सकते हैं.


डिकॉर्टीसेशन (Decortication) – बीजों में मौजूद भूसे को इस प्रक्रिया के दौरान साफ किया जाता है और ऐसा करने के लिए ब्लोइंग एयर (Blowing air) का सहारा लिया जाता है. वहीं बीजों में से भूसे को निकालने के बाद उनकी कंडीशनिंग की जाती है.


बीज की कंडीशनिंग – बीज की कंडीशनिंग करने से उससे अधिक तेल निकलता है और इस प्रक्रिया के तहत इन्हें रोलर्स के अंदर डाला जाता है. दरअसल रोलर्स के अंदर से गुजरने के चलते बीज की कोशिकाए तेल को अवशोषित (absorbed) कर लेती हैं और इनमें सूक्ष्म तेल की बूंदें एकजुट हो जाती हैं, जिसके चलते बीज से आसानी और तेजी से तेल निकाला जा सकता है.


बीज को गर्म करना – कंडीशनिंग के बाद आपको बीज को गर्म करना होता है, ताकि उसमें मौजूद सभी प्रकार के जीवाणु खत्म हो सकें. हालांकि हर बीज के लिए अलग तरह के नमी की स्थिति और तापमान की जरुरत पड़ती है. इसलिए आप जिस बीज से तेल निकाल रहें होंगे, उस बीज के गुण के हिसाब से आपको तापमान तय करना होगा.


तेल निकालना- ऊपर बताई गई प्रक्रिया से गुजरने के बाद, बीजों से तेल निकाला जाता है और इस प्रक्रिया के अंदर इन्हें मशीन में डाला जाता है और मशीन द्वारा इन्हें पीसा जाता है. इसको पीसने के दौरान इनमें से जो तेल निकलता है, वो एक जगह इकट्ठा कर लिया जाता है.


छानने का काम (filtration)- निकाले गए तेल के अंदर पीसे हुए बीज के कुछ अवशेष रह जाते हैं. इसलिए तेल निकल जाने के बाद उसे छाना जाता है, ताकि वो पूरी तरह से साफ हो सके. तेल को साफ करने के बाद भी उसमें कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ मौजूद होते हैं, जिन्हें रासायनिक प्रक्रिया के अंदर साफ किया जाता है.


तेल के लिए पैकेजिंग- बनकर तैयार हुए तेल को छोटे पैकेट या बड़े पैकेट में पैक किया जाता है, उस पर अपने कंपनी का नाम, पता, क्षमता बनाने की तिथि, समाप्ति तिथि, कंपनी का पता नाम आदि जानकारियों को अंकित किया जाता है। आपके द्वारा बनाए गए पदार्थ को यदि आप शानदार तरह से पैक करते हैं। आपके द्वारा की गई पैकेजिंग और लेबलिंग बाजार में अप्रूव हो जाती है तो आप का प्रोडक्ट आसानी से बाजार में बिक रहा शुरू हो जाएगा। हर बिजनेस में पैकेजिंग और लेबलिंग बहुत ही ज्यादा मायने रखती है।


इन सभी चरणों के द्वारा आप का तेल बिकने के लिए तैयार हो जाता है। आप इन्हें विभिन्न प्रकार के पैकेट या केन में भरकर बाजारों में इन्हें बेच सकते हैं।



लाइसेंस और प्रमाणीकरण (Licenses And Certification) –

तेल की मिल शुरू करने से पहले आपको विभिन्न प्रकार के लाइसेंस और प्रमाण पत्रों की आवश्यकता होती है। क्योंकि यह व्यवसाय सीधे तौर पर मनुष्य के स्वास्थ्य और शरीर से संबंध रखता है। इस कारण भारत सरकार के द्वारा इस व्यवसाय के लिए विभिन्न प्रमाण पत्रों और लाइसेंस को निर्धारित किया गया है। यह सभी प्राप्त होने के बाद ही कोई व्यवसायी इस व्यवसाय को शुरू कर सकता है।


भारत सरकार के द्वारा खाद्य पदार्थों से जुड़े व्यवसाय के लिए मुख्य रूप से दो प्रकार के लाइसेंस प्रदान किए जाते हैं, जिनमें से पहला लाइसेंस भारतीय मानक ब्यूरो के द्वारा प्रदान किया जाता है। वही दूसरा लाइसेंस एफएसएसएआई के द्वारा दिया जाता है एवं यह व्यापार आप भारत की जिस किसी भी राज्य में शुरू करना चाह रहे हैं, उस राज्य की सरकार से भी कई प्रकार के लाइसेंस आपको प्राप्त करना होता है।



तेल की मिल की लोकेशन और मार्केट रिसर्च

कोई भी व्यापारी जब अपना व्यवसाय शुरू करने वाला होता है तो एक प्रश्न हमेशा उसके दिमाग में होता है कि व्यवसाय किस जगह स्थापित किया जाए। तेल की मिल की यदि बात की जाए तो व्यापारी को लोकेशन ढूंढते समय यह ध्यान रखना चाहिए, जहां कहीं भी मिल को स्थापित किया जाए वहां से ट्रांसपोर्टेशन की अच्छी व्यवस्था होना चाहिए। ताकि कच्चे माल को मिल तक लाने पहुंचाने में समय ज्यादा बर्बाद ना हो एवं यातायात पर ज्यादा खर्चा ना हो।


आप जब मिल के लिए स्थान का चयन कर रहे हो तो आप शहर के आसपास भी जगह चयनित कर सकते हैं, जहां से फैक्ट्री आदि किराए पर दी जा रही हो और मार्केट भी पास में हो।



स्टाफ का चयन

स्टाफ का चयन करते समय व्यापारी को यह ध्यान रखना चाहिए कि बिजनेस के अंदर कोई भी कार्य वहां उपस्थित स्टाफ के द्वारा ही किया जाता है। वह जितने कुशल और प्रशिक्षित होंगे व्यापार की प्रगति उतनी ही अधिक होगी क्योंकि तेल का व्यापार मशीनों द्वारा संचालित होने वाला व्यापार है। इसके लिए कुशल एवं प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता होती है, जो कि मशीनों को संचालित करना जानते हो।



लोकेशन (location for business)–

आप अपनी मिल को उस जगह पर खोलें, जहां पर ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा अच्छी हो और कच्चे माल को फैक्ट्री तक पहुंचाने में ज्यादा समय ना लगे और ट्रांसपोर्टेशन में आपका ज्यादा खर्चा भी नहीं आएं. इसके अलावा अगर आप अपनी फैक्ट्री खोलने के लिए जगह की तलाश कर रहे हैं तो आप अपने शहर की किसी लोकल साईट में देख सकते है, कि किन जगहों पर फैक्ट्री किराए पर दी जा रही है.



बाजार में सरसों तेल की सप्लाई (Mustard oil supplied in the market)

  • अगर आप अपने बिजनेस को अच्छी पहचान देना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपनी कंपनी को एक अच्छा नाम देना होगा.

  • तेल को प्लास्टिक के बोतल, पाउच तेल कंटर में पैक करना होगा.

  • इसके बाद कंपनी का लेबल लगाना होगा.

  • अब आप अपने उत्पाद को बाजार में सप्लाई के लिए भेज सकते हैं.



मिल को शुरू करने से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें –

  • तेल को फ़िल्टर किए जाने के बाद वो केवल 18 महीने तक सही रहता है. इसलिए आपको तेल को बेचने का नेटवर्क अच्छे से तैयार करना होगा. ताकि जैसे ही आपका तेल बनकर तैयार हो जाए, तो आप तुरंत उसको थोक व्यापारियों के जरिए बाजार में बेच सकें.

  • जिन लोगों को आप कार्य पर रखेंगे, उन्हें आपको कुछ दिनों तक तेल किस तरह से निकाला जाता है, इस चीज की ट्रेनिंग देनी होगी. ताकि वो सही से मशीनों को चला सकें और उन्हें तेल निकालने में किसी प्रकार की परेशानी ना आए.

  • आप जिस बीज का तेल निकालना चाहते हैं, आपको उस बीज के हिसाब से मशीन को खरीदना होगा. यानी अगर आप मूंगफली का तेल निकालना चाहते हैं तो आपको मूंगफली शेलर मशीन की जरूरत पड़ेगी, जबकि बिनौला का तेल (cottonseed oil) निकालने के लिए आपको डिस्क हुलर की जरूरत पड़ेगी.

  • आप इस व्यापार को और भी बढ़ा सकते हैं और एक तरह के बीज का तेल बेचने के अलावा, दो तीन प्रकार के बीजों का भी तेल बेच सकते हैं और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. हालांकि आप तभी इस व्यापार को और बढ़ाएं, जब आपको मुनाफा होने लगे.



तेल की मिल का व्यापार के लिए मार्केटिंग

किसी भी बिजनेस को सफल बनाने के लिए उस बिजनेस से संबंधित मार्केटिंग करना बहुत ही जरूरी है। मार्केटिंग वर्तमान में ऑनलाइन ऑफलाइन दोनों माध्यम से की जा रही है। जिस प्रकार से आप टीवी और मोबाइल में अलग-अलग चैनल पर या अखबारों में खाद्य तेल एडवर्टाइजमेंट के रूप में बैनर व वीडियो जरूर देखते होंगे। इसी प्रकार से आपको भी अपने बिजनेस का एडवर्टाइजमेंट करवाना बहुत ही जरूरी है।


एडवर्टाइजमेंट के माध्यम से अपने बिजनेस को ऊंचाइयों तक ले जाया जा सकता है या ऐसे भी कह सकते हैं कि आप अपने बिजनेस में एडवर्टाइजमेंट के माध्यम से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। मार्केटिंग के माध्यम से जितना पैसा आपको मिलता है, उतना पैसा कहीं से भी नहीं मिल सकता मार्केटिंग के तौर पर आप मार्केटिंग एजेंट का चयन भी कर सकते हैं। इसके अलावा मार्केटिंग में अपने स्टाफ को भेजकर भी अपने प्रोडक्ट को प्रमोट करवा सकते हैं।



तेल की मिल का व्यापार की लागत

यह व्यापारी की क्षमता पर निर्भर करता है कि वह व्यापार को किस स्तर और कितनी लागत से शुरू करना चाह रहा है। यदि व्यापारी निम्न स्तर से व्यापार शुरू करना चाहता है तो वह अपनी जमा पूंजी या सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर भी ऋण प्राप्त कर सकता है। क्योंकि वर्तमान समय में भारत सरकार के द्वारा विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं, जो ऐसे व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लिए ऋण उपलब्ध करा रही है।


लेकिन यदि आप बड़े स्तर से व्यापार शुरू करना चाह रहे हैं तो आपको बहुत अधिक पूंजी की आवश्यकता होगी। क्योंकि इस व्यवसाय में मशीनों के साथ-साथ कच्चा माल और मजदूरों की भी आवश्यकता होती है एवं रखरखाव भी करना होता है। जिसके लिए आपको अधिक पूंजी की आवश्यकता होगी और यह पूंजी आप सरकारी योजनाओं और ऋण के माध्यम से पूरा कर सकते हैं।



तेल मिल बिजनेस में जोखिम

तेल मिल व्यवसाय को शुरू करते समय हमें कुछ महत्वपूर्ण बातों को याद रखना चाहिए:

  • यह एक ऐसा व्यवसाय है, जिसमें जोखिम की मात्रा होती है। क्योंकि तेल को फिल्टर किए जाने के पश्चात यह मात्र 18 माह तक ही सही रहता है। इसके बाद यह खराब होना शुरू होता है। अतः उत्पादन से पहले आपको एक नेटवर्क तैयार करना होगा, जिसमें आप व्यापारियों और दुकानदारों से संपर्क स्थापित कर अपने उत्पाद को उन्हें समय रहते भेज दें ताकि जब भी आपका तेल बनकर तैयार हो और आप उन्हें तुरंत ही थोक व्यापारियों को बेच सकें।

  • तेल मिल में कार्य पर रखे गए व्यक्तियों का प्रशिक्षित होना बहुत अधिक आवश्यक होता है। अतः आप जिस किसी भी व्यक्ति को इस कार्य में लगाएं उन्हें एक पर्याप्त ट्रेनिंग प्रशिक्षण दें। ताकि वह मशीनों को अच्छे से चलाना सीख सकें और उनसे तेल निकाल सकें।

  • जैसा कि हम पूर्व में ही कह चुके हैं कि अलग-अलग बीज और तेल के हिसाब से मशीनें अलग-अलग होती हैं। यदि आप मूंगफली का तेल निकालना चाह रहे हैं तो आपको उसके लिए एक अलग मशीन की आवश्यकता होगी क्योंकि अलग-अलग बीज की साइज़ अलग अलग होती है एवं उनको बनाने की प्रक्रिया भी अलग होती है। अतः आप अपने बीज  के हिसाब से मशीनों का चयन करना होगा।


इस व्यापार में जोखिम की मात्रा निहित होती है। लेकिन यदि सभी कार्य प्लानिंग के साथ सही समय पर किए जाएं तो आपकी जोखिम की मात्रा निश्चित तौर पर कम हो जाएगी।



बिजनेस से मुनाफ़ा (Profit from business)

लाभ की संभावना

अगर आपके बिजनेस में तेल की गुणवत्ता अच्छी है, तो बाजार में आपके उत्पाद की मांग बढ़ती जाएगी. इस तरह लोग आपकी कंपनी का तेल खरीदना पसंद करेंगे, साथ ही कंपनी को एक  पहचान मिलोगी. इस तरह सरसों से तेल निकालने का बिजनेस सफल साबित होगा. इस बिजनेस से आप हर महीने हजारों रुपए की कमाई कर पाएंगे.


तेल के मिल व्यापार में जोखिम के साथ-साथ लाभ की संभावना उतनी ही अधिक होती है। एक बार जब आप इस व्यवसाय में स्थापित हो जाते है तब आप की जोखिम कम हो जाती हैं और निरंतर ही आप लाभ की ओर अग्रसर होते जाते हैं। एक समय के बाद आप एक साथ में कई प्रकार के तिलों का उत्पादन भी कर सकते हैं, जिसके लिए आप उनकी अलग-अलग मशीनों को स्थापित कर तेल निकाल सकते हैं।




FAQ

People also ask

1 कुंटल तेल में कितना तेल निकलता है?

1 क्विंटल सरसों में 36 लीटर तेल (औसतन) निकलता है. - सरसों का दाम 8,550 रुपए क्विंटल है. - शुद्ध तेल का दाम 210 रुपए प्रति लीटर.


1 किलो सरसों में कितना तेल निकलता है?

क्या है सरसों तेल का गणित

डॉ. पीके राय, निदेशक-सरसों अनुसंधान केंद्र, भरतपुर के अनुसार, एक क्विंटल सरसों में औसतन 36 लीटर के आसपाल तेल निकलता है.


सरसों का तेल निकालने की मशीन कितने की है?

सरसों मिल के लिए आपको 15KW/20 HP (हॉर्स पॉवर) की मोटर लगानी होगी, जिसकी कीमत 40,000 रुपये आएगी। तेल निकालने की मशीन जो कि एक लाख रुपये की मिलेगी। कुल मिलाकर तेल मिल खोलने के लिए आपको 2 लाख रुपये की लागत आएगी, जिसमें लेबर चार्ज भी शामिल है।


सरसों तेल मिल में कितना मुनाफा?

सरसों तेल मिल के बिजनेस में कितना मुनाफा होता है

उदाहरण स्वरूप अगर एक बोतल सरसों तेल के निर्माण में 100 रुपये भी खर्च हुए है और आप इसे बाजार में 120 रुपये के हिसाब से बेच रहे है तो एक बोतल या पाउच पर आपको 20 रुपये का लाभ प्राप्त होता है।


100 किलो तिल में कितना तेल निकलता है?

एक किलो स्वस्थ तिल पेरने पर अधिकतम आधा लीटर तेल निकलता है।


10 किलो मूंगफली में कितना तेल निकलता है?

एक आंकड़े के मुताबिक एक मीट्रिक टन यानिकी 1000 किलो मूंगफली से लगभग 420 लीटर मूंगफली का तेल, 420 किलो ग्राउंडनट केक और लगभग 40 किलो मूंगफली का अपशिष्ट (गाद) निकलता है ।


15 किलो सरसों का तेल कितने का है?

फतेहगंज के तेल कारोबारी मुकेश अग्रवाल ने बताया कि लखनऊ में सरसों तेल 15 लीटर पीपा 2450-2500 रुपये है। इसी प्रकार रिफाइंड तेल 15 लीटर पीपा 2270-2350 रुपये हैं।


25 किलो सरसों में कितना तेल निकलता है?

पचास किलो सरसों में 12 से 15 लीटर तक तेल निकलता है. जो सरसों बीज की क्वालिटी पर निर्भर करता है.


सरसों के तेल में किसकी मिलावट की जाती है?

वर्तमान में सरसों के तेल में चावल की भूसी यानी राइस ब्रान तेल, पाम तेल या अन्य किसी सस्ते खाद्य तेल की मिलावट की जाती है। सरसों के तेल उत्‍पादन में आगरा देश मे अग्रणी है।


सरसों का तेल घर पर कैसे बनाएं?

  1. बीज को दबाकर बनाया गया एक वसायुक्त वनस्पति तेल,

  2. एक गंध तेल जो बीज को पीस कर, उसे पानी में मिलाकर और आसवन द्वारा उदवायी तेल को निकाल कर बनाया जाता है।

  3. सरसों के बीज के तेल को दूसरे वनस्पति तेल के साथ मिश्रित कर बनाया गया एक तेल, जैसे सोयाबिन तेल।


सरसों का तेल सबसे अच्छा कौन सा है?

हमारे आखिरी टेस्ट में दो विजेता सामने आए हैं। पी मार्क मस्टर्ड ऑयल और पतंजली कच्ची घानी मस्टर्ड ऑयल। दोनों तेल का स्वाद और खुशबू पकाते समय अच्छा थी। पी मार्क मस्टर्ड ऑयल सबसे कम मात्रा में इस्तेमाल हुआ है जिससे यह सरसों के तेल का फ्लेवर निकलकर आता है।


तेल की मील शुरू करने के लिए कितना इन्वेस्टमेंट लगाना पड़ता है?

यदि कोई व्यक्ति तेल की मील का बिजनेस शुरू करना चाहता है तो ऐसे में व्यक्ति को काफी उच्च इन्वेस्टमेंट की आवश्यकता होती है। इस बिजनेस को शुरू करने के लिए 50 लाख से एक या दो करोड़ तक का इन्वेस्टमेंट व्यक्ति को लगाना होता है तब जाकर तेल की मील का पूरा सेटअप तैयार होता है। या हो सकता है कि यदि व्यक्ति अपने बिजनेस को और अधिक मॉडिफाई करना चाहें तो ऐसे में व्यक्ति को ज्यादा इनवेस्टमेंट की भी जरूरत पड़ सकती है।


तेल की मील का बिजनेस शुरू कर के व्यक्ति कितना पैसा कमा सकता है?

यदि व्यक्ति अपने खुद की मिल का बिजनेस शुरू कर दे तो उसके बाद पैसा कितना कमाए इसके बारे में ज्यादा जानकारी लेने की जरूरत नहीं रहती है। क्योंकि मिल का बिजनेस शुरू होने के पश्चात व्यक्ति की कमाई भी बहुत बेहतरीन होना शुरू हो जाती है। यदि व्यक्ति 50 नाक से एक या दो करोड़ के इन्वेस्टमेंट पर अपना बिजनेस शुरू करता है तो ऐसे में व्यक्ति 5 लाख से 10 लाख रुपए प्रति महीना आराम से कमा सकता है।


क्या तेल की मील का बिजनेस शुरू करने के लिए रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होती है?

जी हां, इस बिजनेस को शुरू करने के लिए व्यक्ति को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ व्यक्ति को खाद्य पदार्थ डिपार्टमेंट से FSSAI का लाइसेंस देना भी जरूरी होता है।


क्या तेल की मील के बिजनेस में नुकसान होने के चांस रहते हैं?

इसके बारे में पहले से सटीक कहना मुश्किल है। यदि आपके द्वारा उत्पादित तेल कि क्वालिटी अच्छी नहीं है या पैकेजिंग अच्छी नहीं है। ऐसे में आप का प्रोडक्ट बाजार में फ्लॉप हो सकता है। इसके अलावा मेंटेनेंस और प्रोडक्ट का उत्पादन सही नहीं होने की वजह से भी बाजार में आपका व्यापार फ्लॉप चला जाएगा और आपको भारी नुकसान हो सकता है।




निष्कर्ष

तेल की मिल जहां पर अलग-अलग प्रकार के तेल रिफाइंड किए जाते हैं। खाने के तेल की मील यदि कोई व्यक्ति खोलता है तो व्यक्ति को आसानी से अच्छा मुनाफा हो सकता है। तेल की मील खोलकर व्यक्ति बिजनेस को उचित स्तर तक आसानी से ले जा सकता है। इसके लिए व्यक्ति को तेल की मिल से उत्पादित तेल क्वालिटी का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है।


आज के इस आर्टिकल में हमने बात की तेल के व्यवसाय को स्थापित करने की, उसके महत्व, जोखिम की, तेल के मिल का व्यवसाय कहां होना चाहिए, स्टाफ का चयन कैसे करें एवं तेल निकालने की प्रक्रिया क्या होती है।


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